Potato Cultivation : इस तकनीक से हवा में होगी आलू की खेती, 10 गुना से ज्यादा होगी पैदावार, बढ़ेगा मुनाफा

26
Aeroponic Potato Farming Idea

Aeroponic Potato Farming Idea: बिहार के किसान अब नई तकनीक से आलू की खेती करेंगे. इस तकनीक का नाम एरोपोनिक तकनीक है, जिससे अब जमीन की जगह हवा में आलू की खेती होगी और उपज भी 10 गुना तक बढ़ जाएगी। यह कहना है अगवानपुर कृषि अनुसंधान केंद्र, सहरसा के वैज्ञानिक पंकज कुमार राय का, जो हरियाणा के करनाल स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र से आलू की खेती की नई तकनीकों का अध्ययन कर लौटे हैं।

आप सोच रहे होंगे कि हवा में आलू की खेती कैसे संभव है, लेकिन यह संभव हो गया है. दरअसल एरोपोनिक आलू की खेती एक ऐसी तकनीक है जिससे बिना मिट्टी और जमीन के भी आलू की खेती की जा सकती है. इस तकनीक से मिट्टी और जमीन दोनों की कमी को पूरा किया जा सकता है।

एरोपोनिक आलू (Aeroponic Potato Farming) की खेती का आविष्कार हरियाणा के करनाल जिले में स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा किया गया है। इस तकनीक की खास बात यह है कि खेती में इस तकनीक से मिट्टी और जमीन दोनों की कमी को पूरा किया जा सकता है और अगर इस तकनीक से खेती की जाए तो आलू की पैदावार 10 गुना तक बढ़ जाएगी। इस तकनीक से आलू की खेती को सरकार ने मंजूरी दे दी है।

आपको बता दें कि आलू प्रौद्योगिकी केंद्र करनाल ने अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद, भारत सरकार ने एरोपोनिक आलू (Aeroponic Potato Farming) की खेती का उपयोग करके आलू की खेती को मंजूरी दे दी है।

इस तकनीक से किसानों की आय बढ़ेगी

एरोपोनिक आलू की खेती (Aeroponic Potato Farming) से किसानों को काफी लाभ होगा, क्योंकि इससे किसान कम लागत में अधिक से अधिक मात्रा में आलू का उत्पादन कर सकते हैं और अधिक उपज मिलने से उनकी आय में भी वृद्धि होगी। इस तकनीक के जानकारों का कहना है कि इस तकनीक में लटकती जड़ों के जरिए उन्हें पोषक तत्व दिए जाते हैं। जिसके बाद इसमें मिट्टी और जमीन की जरूरत नहीं रहती है।

सहरसा जिले के कृषि विज्ञान केंद्र अगवानपुर के कृषि वैज्ञानिक आलू की खेती की नई तकनीक का अध्ययन कर हरियाणा के करनाल स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र से लौटे हैं। अगवानपुर कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. पंकज कुमार राय का कहना है कि कई किसान जो अभी भी पारंपरिक खेती करते हैं।

उनकी तुलना में यह तकनीक उनके लिए काफी फायदेमंद हो सकती है. इस तकनीक से आलू के बीज की उत्पादन क्षमता को 3 से 4 गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इस तकनीक से न केवल हरियाणा के किसानों बल्कि अन्य राज्यों के किसानों को भी लाभ होगा। इस तरह नई तकनीकों के आने से किसानों की जानकारी के साथ-साथ उनकी आमदनी भी बढ़ रही है। जो उनके और हमारे राज्य दोनों के लिए बेहतर है।