Meta Warning: फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म की मूल कंपनी मेटा ने जानकारी दी है कि चैटजीपीटी जैसे जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आड़ में कई यूजर्स को उनके सिस्टम पर मैलवेयर से संबंधित कोड इंस्टॉल कर दिया गया है।
कंपनी को एक महीने तक चली सुरक्षा जांच के दौरान चैटजीपीटी और इस चैटबॉट जैसे एआई टूल्स के नाम पर मैलवेयर मिला। कंपनी के मुख्य सूचना अधिकारी गाय रोजेन ने चैटजीपीटी और उसके जैसे एआई टूल्स से जुड़े कई बड़े खुलासे किए।
टेक्नोलॉजी हैकर्स की हथकंडा
मेटा के मुख्य सूचना अधिकारी गाय रोसेन ने एक ब्रीफिंग के दौरान कहा कि हैकर्स हमेशा अपने काम में लोकप्रिय विकास का इस्तेमाल करते रहे हैं।
अनूठी विशेषताओं वाली किसी भी नई तकनीक का आना बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करता है, ऐसे में लोकप्रिय तकनीक हैकर्स के लिए भी हैकिंग का एक नया रास्ता खोलती है।
असली दिखने वाली वेबसाइट और लिंक यूजर्स को फंसाने के लिए बनाए जाते हैं ताकि डेटा चोरी हो सके। गाय रोसेन ने कहा कि यह केवल चैटजीपीटी से संबंधित नहीं था, क्रिप्टो क्रेज के बाद भी क्रिप्टो स्कैम से संबंधित कई मामले सामने आए थे।
हजारों वेब एडरेस ब्लॉक किए मालवेयर से जुड़े
कंपनी ने बताया कि उसके प्लेटफॉर्म पर यूजर की सुरक्षा और निजता को देखते हुए हजारों वेब एड्रेस को सर्च कर ब्लॉक कर दिया गया है. ब्लॉक किए गए वेब पते ChatGPT जैसे टूल से जुड़े थे। कंपनी ने कहा, यूजर की सुरक्षा के लिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन यूजर को भी पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
ChatGPT में खामियों से कोई इंकार नहीं
बता दें, अमेरिका की आर्टिफिशियल स्टार्टअप कंपनी OpenAI ने पिछले साल AI तकनीक पर आधारित चैटबॉट पेश किया था। यह चैटबॉट चैटजीपीटी के नाम से पहले टेक की दुनिया में सबसे लोकप्रिय शब्द बन गया और कुछ ही महीनों में यह इंटरनेट की दुनिया का सबसे लोकप्रिय शब्द बन गया।
हर यूजर इस चैटबॉट को आजमाने लगा, क्योंकि चैटबॉट इंसान जैसा टेक्स्ट जेनरेट करने की क्षमता के साथ लाया गया था। यह यूजर को कई कामों में काफी मदद करता है।
अपनी खूबियों के लिए सुर्खियां बटोरने वाला चैटजीपीटी तब बड़ी चिंता का विषय बन गया जब इस चैटबॉट के बड़े खतरे समाज में गलत और अधूरी जानकारी फैलाने, साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए करने लगे।