मौका न मिले तो स्वाभिमान से बाहर निकल जाना चाहिये : पंकजा मुंडे

43
If you don't get your self-respect, leave from there: Pankaja Munde

पंकजा मुंडे : 2019 के विधानसभा चुनाव में कई दिग्गजों को झटका लगा था, उनमे स्व.गोपीनाथ मुंडे कि पुत्री एवं दिग्गज ओबीसी नेता पंकजा मुंडे को भी इसका सामना करना पड़ा।

एनसीपी विधायक और भाई धनंजय मुंडे से हारने के बाद पंकजा मुंडे का राजनीतिक सफर कठिन हो गया है, तब से अब तक पंकजा मुंडे अपने पैर जमाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। हालांकि, राज्य कि राजनीती में पुनर्वास नहीं हुआ है।

इस राजनैतिक संघर्ष के कई मायने है। इसीलिये उन्हें अभी तक पार्टी की ओर से कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। इससे वे परेशान और नाराज हैं। पंकजा मुंडे ने कई बार अपनी नाराजगी जाहीर कि है।

उनके समर्थक भी हर बार पार्टी के नेताओं को स्व.गोपीनाथ मुंडे और स्व.प्रमोद महाजन के कार्य और त्याग कि याद दिला देते है।

पंकजा मुंडे ने खुले तौर पर यह कहकर अपनी नाराजगी जाहिर की है कि, अगर तुम्हे किसी जगह मौका नहीं मिल रहा है, तो स्वाभिमान और आत्म सम्मान के लिये वहा से बाहर निकलना कभी भी बेहतर विकल्प होता है।

इस बयान से राजनैतिक अटकले तेज हो गई है, सबसे पहले राज्य राजनीती में एक हि सवाल चर्चा में है, क्या पंकजा मुडे छोड़ देंगी राजनीति? क्या, उनकी बेचैनी विद्रोह कि ओर जा रही है ।

क्या उनके लिये भाजपा में राजनैतिक मौके के दरवाजे बंद हो चुके है, इसी विषय को उनके इस बयान से जोडा जा रहा है, फिलहाल ऐसी चर्चा रंग गई है।

बीजेपी नेता पंकजा मुंडे ने बयान दिया है कि, मौका न मिले तो स्वाभिमान से बाहर निकलना कभी भी अच्छा विकल्प नहीं होता, लेकीन आत्मसम्मान और स्वाभिमान के लिये ये विकल्प चुनना जरुरी हो जाता है।

खुले मंच से और खुले तौर पे ये बयान देकर अपनी नाराजगी भी जताई है, मुझे राजनीती में मौका क्यों नहीं दिया जाता? उनसे सवाल उनसे पूछिए जो मुझे मौका नहीं देते हैं। उन्होंने यह बयान नासिक में स्टूडेंट समिट कार्यक्रम में दिए एक इंटरव्यू में दिया।

अगर आप के पास अच्छी गुणवत्ता होकर भी काम करने का कोई अवसर नहीं दिया जा रहा है, तो एक गरिमापूर्ण एक्झिट हमेशा एक अच्छा विचार और विकल्प होता है।

पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे ने स्टूडेंट्स समिट कार्यक्रम में एक साक्षात्कार के दौरान कहा। आगे उन्होने कहां, लेकिन अपने समर्थक और लोगों द्वारा दिया गया प्यार और मैंने जो विश्वास कमाया है, वह कभी कम नहीं होगा।

सिर्फ इतिहास पढ़ने से काम नहीं चलता, इतिहास बनाना चाहिए

पंकजा मुंडे को महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में आयोजित एक दिवसीय छात्र सम्मेलन में सम्मानित किया गया।

इस दौरान उन्होंने अपने बचपन की पढ़ाई, कॉलेज लाइफ और राजनीति में सफर का खुलासा किया। उनके पिता स्व. गोपीनाथ मुंडे द्वारा दी गई शिक्षाओं के अनुसार लोगों को सिर्फ इतिहास पढ़ना नहीं, बल्कि इतिहास बनाना चाहिए।

मैं उनकी उसी सोच पर अंमल कर रही हूं। यह बेटी पिता कि शिक्षा और संस्कार पे कायम है, न कभी झुकुंगी और ना ही तुट जाउंगी। क्योंकी, मुझ में अभी भी मेरे पिता के संस्कार बाकी है।

राजनीती हो या सामाजिक जीवन आपका उद्देश स्पष्ट होना चाहिये। मेरा उद्देश और व्हिजन स्पष्ट है, किसी भी हालात में ना झुकुंगी ना तूट जाउंगी।

मेरे पिता का स्वाभिमानी खून और संस्कार अभी भी मेरे शरीर में है। इस संबंध में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि, मैं वर्तमान में महाभारत में भीष्मपितामह की भूमिका निभा रहा हूं।

मैं राजनीति में भी बहुत धैर्यवान रही हूं

किसी चीज को पाने के लिये अपने विचार और संस्कार से कोई कॉम्प्रमैज नहीं करूंगी, मैं अपने परिवार में, समाज में और राजनीति में भी बहुत धैर्यवान रही हूं।

मुझे विश्वास है कि यह धैर्य मुझे वह देगा जो मैं चाहती हूँ और मेरी स्थिति को बदल देगा। मैंने राजनीति में बहुत कुछ हासिल किया है और हासिल करना चाहती हूं और मैं इसे हासिल करूंगी।

उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि उन्हे मौका मिलेगा। लेकीन अभी इम्तिहान बाकी है, इसमें कोई संदेह नहीं है।

पिता गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद दुख और अपमान सहा

मेरे पिता गोपीनाथ मुंडे की मृत्यु के बाद मुझे बहुत अवहेलना, पीड़ा, दुख, अपमान का सामना करना पड़ा। मैंने इन सभी दर्दों को हसकर पचा लिया, हर संकट का डटकर मुकाबला किया।

आज मुझे एहसास हुआ कि गोपीनाथ मुंडे को विरासत में पाना इतना आसान नहीं है। उनका संघर्ष और स्वाभिमान कि किंमत और अहमियत समझ रही हुं, यह कहकर अपने दर्द और भावनाओं को व्यक्त किया।

इस बयान के बाद महाराष्ट्र कि राजनीती में फिर एक बार पंकजा मुंडे का क्या होगा? उनका आनेवाला कल कैसे होगा? क्या पार्टी में उन्हे जगह मिलेगी, या उन्हे पार्टी से प्रताडना ही मिलेगी, इसका जवाब आनेवाले वक्त हि देगा।