Chanakya Niti : इस वजह से जल्दी बूढ़े हो जाते हैं स्त्री-पुरुष, जानिए क्या कहती है चाणक्य नीति

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Chanakya Niti

Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों के माध्यम से मनुष्य को बहुत महत्वपूर्ण और मजबूत संदेश दिए हैं। चाणक्य के नीति शास्त्र में जीवन के सभी पहलुओं पर नीतियां बनाकर आम आदमी तक पहुंचाई गई हैं। चाणक्य ने अपने नीतिशास्त्र से पाप, पुण्य, कर्तव्य और अन्याय, धर्म की बात कही है, अपनी नीतियों से व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।

चाणक्य नीति में ऐसी कई बातें कही गई हैं, जिनका पालन करने से आप किसी भी परेशानी से बाहर निकल सकते हैं। आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र के चौथे अध्याय में बताया है कि बुढ़ापा जल्दी आता है। नीति शास्त्र के चौथे अध्याय के 17वें श्लोक में स्त्री, पुरुष और घोड़े की वृद्धावस्था के बारे में बताया गया है।

चाणक्यनीति दर्पण के चौथे अध्याय का सत्रहवां श्लोक 

अध्वा जरा मनुष्याणां वाजिनां बन्धनं जरा ।

अमैथुनं जरा स्त्रीणां वस्त्राणाम् आतपो जरा ।।”

अर्थ – मनुष्यों के लिए पैदल न चलना, घोड़ों को बाँधकर रखना, स्त्रियों के लिए असम्भोग (मैथुन न करना) और वस्त्रों के लिए धूप जरा (बुढापा) लाने का कारण है.

पुरुष तेजी से उम्र क्यों बुढे होते हैं?

आचार्य चाणक्य बताते हैं कि मर्यादा में चलना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है और इससे समय से पहले बुढ़ापा नहीं आता, लेकिन जरूरत से ज्यादा और लंबे समय तक चलने से शरीर में थकावट और बुढ़ापा आ जाता है। दूसरी ओर, यदि घोड़ों को लगातार पट्टे पर रखा जाए, तो उनकी शक्ति धीरे-धीरे कम हो जाएगी।

अगर घोड़े कि तरह कड़ी मेहनत करते रहेंगे तो वे लंबे समय तक मजबूत रहेंगे। दूसरी ओर, आचार्य चाणक्य ने महिलाओं की शारीरिक क्षमता को देखते हुए बताया कि कैसे उनकी उम्र तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा आचार्य चाणक्य ने वस्त्रों को जीवन का आवश्यक अंग मानते हुए कहा था कि वस्त्रों को अधिक धूप में रखने से वे कमजोर हो जाते हैं और जल्दी फटने लगते हैं।

आचार्य ने महिलाओं के बारे में क्या कहा?

आचार्य ने यहाँ महिलाओं के बारे में जो कुछ कहा है, वह पढ़ने में कठिन लग सकता है, लेकिन यह सच है, शरीर रचना की दृष्टि से, भौतिक सुख पुरुष और महिला शरीर की जैविक आवश्यकता से अधिक है।

इसलिए स्त्री की वृद्धावस्था के संबंध में चाणक्य ने कहा है कि, यदि पति अपनी पत्नी से प्रेम न करे अर्थात स्त्री को यदि शारीरिक सुख न मिले तो वह संतुष्ट नहीं होती।

इस संदर्भ में प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति यह स्वीकार करता है कि यदि उसमें असंतोष है तो मन के स्तर पर यदि ऐसा हो जाए तो बुढ़ापा अवश्य आ जाएगा। धूप में ज्यादा देर रहने से कपड़े जल्दी फट जाते हैं, क्योंकि धूल मिट्टी की गंदगी और गर्मी कपड़े के महीन रेशों को जला देती है।